ओअ्मान /अासिन ११ ओमानमे क्षेत्रीय राजदुत सम्मेलन समपन्न भेल हए । राजधानी मस्कट स्थित ग्रैण्ड हाेटेल मे काल्हु आयोजित खाडि मुलुक , केन्द्र एसिया, पश्चिम एसिया अा अफ्रिका क्षेत्रके नेपाली राजदूतसब के क्षेत्रीय सम्मेलन प्रधानमन्त्री
शेरबहादुर देउवा के उपस्थितिमे समपन्न भेल हए । अाेमान भ्रमण के दुसरका दिन काल्हु प्रधानमन्त्री देउवा नेपाली आप्रवासी कामदार सब के हकहित अा संरक्षणके लेल काम करेला राजदूतलाेग के निर्देशन देले छत । सम्मेलन मे बाेलइत प्रम देउवा खाडि देश अाेमान सहित अन्य देशमे कार्यरत नेपाली कामदारलाेग के समस्या समाधानके लेल निर्देशन देइत एइ प्रति सरकार गम्भीर रहल विचार व्यक्त कएले रहलन । एइ अवसर पर बाेलइत श्रम अा रोजगार मन्त्री फरमुल्लाह मन्सुर श्रम स्वीकृति लगायत के काम सब दूतावास से हि करेला राजदूतलाेग निर्देशन दिले रहलन । सम्मेलनमे बाँकी देशके साथ श्रम सम्झौता करेके लेल , नेपालके पर्यटन अा विदेशी लगानी बढाबे के अाेर राजदूतसब द्वारा निर्वाह कएल जाएबाला भूमिका के विषयमे विचार विमर्श भेल स्राेत जनाएले हए । सम्मेलनके अवसर पर ओमानके लेल नेपाली राजदूत शर्मिला पराजुली ढकाल, साउदी अरबके लेल नेपाली राजदूत डा महेन्द्र सिंह, साउदी अरब के जेद्धाके लेल नेपाली कार्यवाहक महावाणिज्यदूत रेवती पौडेल, कतारके लेल नेपाली राजदूत रमेश कोइराला, इजरायलके लेल नेपाली राजदूत निरन्जन थापा, दक्षिण अफ्रिकाके लेल नेपाली राजदूत अमृतबहादुर राई, कुवेतके लेल नेपाली राजदूत यज्ञबहादुर हमाल, बहराईनके लेल नेपाली राजदूत पदम सुन्दास, ईजिप्टके लेल नेपाली राजदूत झबिन्द्रप्रसाद अर्याल, दुबईके लेल नेपाली कार्यवाहक राजदूत नेत्रबहादुर टण्डन सहित भिअाइपिलाेग के सहभागीता रहल रहे । साथे अाेमान मे क्रियाशिल विभिन्न संघ संस्था के प्रतिनिधि लाेग के उपस्थिति रहल रहे । सभि राजदूतलाेग अपन अपन देश के अवस्था अा चुनौती के बारेमे प्रधानमन्त्री देउवा के जानकारी करएले रहलन । एहि बिच अाेमान नेपाली एकता समाज प्रधानमन्त्री देउवा समक्ष ८ बुँदे ज्ञापनपत्र बुझएले हए । ज्ञापनपत्रमे घरेलु महिला कामदार लाेग के राेकलगेल श्रम स्वीकृति फेर से चालू करेके , महिला कामदार सब के सरकारके मातहतमे हि विदेश भेजेके लेल व्यवस्था करेके ,प्रवास मे रहल नेपाली सब नेपाल मे हाेएबाला हर किसिम के चुनाव मे समबन्धित देश से हि मताधिकार अा प्रतिनिधित्व के सुनिश्चितता करेला ,फ्रि भिसा अा फ्रि टिकट के नीति के अभिलम्ब कार्यान्वयन करेला ,नेपाल अाेमान सरकार बिच श्रम समझाैंता करे के चर्चा हाेरहल समय मे कमदार सब के निर्धारण कएल जाएबाला तलब अा मूल्य वृद्धि संघे तलब के वृद्धि के भि धयान देबे के सहित ८ बुदेँ ज्ञापनपत्र बुझावइत ध्यानाकर्षण करावल गेल नेपाली एकता समाज अाेमान के अध्यक्ष छबिलाला बस्नेतले जानकारी करएले छत । स्मरणीय हए कि भ्रमण टाेलिमे प्रधानमन्त्री शेर बहादुर देउबा के साथ परराष्ट्र मन्त्री कृष्णबहादुर महरा, श्रम अा रोजगार मन्त्री फरमुल्लाह मन्सुर, महिला बालबालिका अा सामाज कल्याणमन्त्री आशा कोइराला, प्रधानमन्त्रीके परराष्ट्र मामिला सल्लाहकार डा. दिनेश भट्टराई, परराष्ट्र सचिव शंकरदास वैरागी सहित विशिष्ट लाेग चार दिवसिय अाैपचारिक भ्रमण के लेल अभि अाेमान मे रहल हए ।
ओमानमे क्षेत्रीय राजदूत सम्मेलन समपन्न,एकता समाज बुझएले हए ८ बुँदे ज्ञापनपत्र ।
राहत संकलन स्वरूप नेपाली महिला समुह ओमान के तिज कार्यक्रम समपन्न
ओमान / भादाे ११ नेपाली महिला सब के महान चाड हरितालिका तिज के अवसर मे काल्हु ओमान मे भब्यता के साथ तिज विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न भेल हए । नेपाली महिला समुह ओमान हर साल तिज विशेष कार्यक्रमके आयोजना करते अारहल हए लेकिन इ साल कार्यक्रम मात्र न कर के अभि नेपालमे आएल दाहर से प्रभावित परिवार के राहत संकलन करेके रहल संस्था जनएले हए । एहि बिच संकलित रकम जल्दीए नेपाल भेजाबे के तइयारि भेल नेपाली महिला समुह ओमानके सल्लाहकार अन्जु लामा बताएले छत । संस्था के अध्यक्ष उमा आचार्य के सभाध्यक्ष मे सम्पन्न तिज कार्यक्रम के प्रमुख अतिथी के रूपमे नेपाली राजदुतावास मस्कट, ओमानके राजदुत शर्मिला पराजुली ढकाल रहल रहलन । कार्यक्रम के सफल बनाबे के लेल नेपाल से अाएल लोक दोहोरी क्षेत्रके चर्चित गायिका लाेग मिना अधिकारि अा उमा गिरी विशेष अतिथि कलाकार के रूपमे रहल रहलन । एइ अवसर पर गैर- आवसिय नेपाली संघ मध्य पूर्व क्षेत्रीय संयोक डिबि क्षेत्री लगायत ओमानमे रहल अन्य संघ- संस्थाके प्रतिनिधि सब के उपस्थिती एवं आतिथ्यता मे सम्पन्न कार्यक्रम मे ओमान मे कार्यरत करिब चार सय नेपाली कामदार लाेग के सहभागीता रहल रहे ।
एकता समाज ओमान के तिज कार्यक्रम भव्य रूप मे समपन्न
अाेमान/भादाे ३ ओमान नेपाली एकता समाज महिला बिभाग बितल साल के जइसन इ साल भि सातमा प्रगतिशील तिज कार्यक्रम २०१७ भव्य रूप मे समपन्न कएले हए । राजधानी मस्कट स्थित अलमाहा हाेटेल नजदिक रहल अलरिफ हाेटेल घाेब्रामे काल्हु अगस्ट १८ तारिक सुकर के दिन दाहर पिडित के लेल राहत संकलन स्वरूप तिज कार्यक्रम मनावल गेल तिज तयारी समिति संयाेजक लक्ष्मी रायमाझि जानकारी करएले छत ।
समाज के महिला विभाग प्रमुख रायमाझी के अध्यक्षता अा नेपाली राजदूतावास मस्कट अाेमान के महामहिम राजदूत शर्मिला पराजुली ढकाल के प्रमुख अातिथ्यमे समपन्न भेल कार्यक्रम के संचालन जि बि लामा अा रिता तिमल्सिना कएले रहलन । तिज कार्यक्रम के उदघाटन राजदूत पराजुली द्वारा कएल गेल रहे । महिला बिभाग के सचिब मनु सुनार के स्वागत मन्तब्य से सुरू भेल कार्यक्रम मे बाेलइत राजदूत पराजुलि हिन्दु नारिसब के महान पर्व तिज के शुभकामना व्यत्त करइत खाडि मुलुक अाेमान मे रहके भि अपन संस्कृति , पर्व के सभि लाेग मिल के मनावनाइ बहुत हि गर्व के बात रहल बताएलन । कार्यक्रम के प्रायाेजन अाेमान युएइ एक्सचेञ्ज अा अल मुधिश कएले रहे जबकि मिडिया पार्टनर के भूमिका बज्जिका पत्रकार संघ अाेमान अा डिसि नेपाल सहित के अन्य मिडियासब निभएले रहे । एइ अवसर पर रत्तिम सांस्कृति अाेमान के विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ मार्मिक अा राेचक तिज गित अा नृत्यहरू प्रस्तुत कएल गेल अाेमान नेपाली एकता समाज के अध्यक्ष छबिलाल बस्नेतले जानकारी करएले छत । एइ अवसर पर अन्तर्राष्ट्रिय एकता समाज के महासचिव शाेभाकान्त लामिछाने , जन प्रगतिशील मञ्च अाेमान के अध्यक्ष उमेश विक , नेपाली एकता समाज अाेमान के अध्यक्ष छबिलाल बस्नेत, जन सम्पर्क समिति के सभापति फार्सुराम पाेखरेल , नेपाली महिला समूह अाेमान के अध्यक्ष उमा ढुंगाना, गुल्मी सेवा समाज अाेमान के अध्यक्ष सुर्य पन्थी , तामाङ समाज अाेमान के अध्यक्ष राम तमाङ सहित ओमान के सभि संघ संगठन के प्रतिनिधि सहित करिब २ सय जने अाेमानवासि नेपालीसब के उपस्थित रहल नेपाली एकता समाज अाेमान के सचिव जि.बि. लामा जानकारी करएले छत ।
जिनगीभर पुरस्कारमे हर साल दश हजार रुपैया थपइत जाएम :- लालबाबु साह
लालबाबु साह लालबाबु साहके वास्तविक नाओ योगेन्द्र प्रसाद साह हए । बज्जिका भाषाके पहिल राष्ट्रिय कविता प्रतियोगिता कराबेके श्रेय हिनके हए । बज्जिका भाषा विकास परिषद नेपालके संस्थापक उपाध्यक्ष साहक े बज्जिका भाषासे बहुत निकटसे लगाव हए । बज्जिका भाषा आ साहित्यके उपर होएबाला हर छलफल आ कार्यक्रमके सक्रिय सहभागी साह अपना तरपसे कार्यक्रममे आर्थिक सहयोग करते आएल छथिन् । बज्जिका भाषा आ साहित्यके चिन्हाबेके हुनकर चाहना बहुत पहिलेसे ही रहलासे हुनका मनमे अपना तरपसे कुछ करेके लालसा रहे । अपना घरमे सरसलाह कएलाके बाद लोकसाहित्यके संरक्षणके लेल हुन पुरस्कारके स्थापना कएलन् । लालबाबु साहके वास्तविक नाओ योगेन्द्र प्रसाद साह हए । बज्जिका भाषाके पहिल राष्ट्रिय कविता प्रतियोगिता कराबेके श्रेय हिनके हए । बज्जिका भाषा विकास परिषद नेपालके संस्थापक उपाध्यक्ष साहके बज्जिका भाषासे बहुत निकटसे लगाव हए । बज्जिका भाषा आ साहित्यके उपर होएबाला हर छलफल आ कार्यक्रमके सक्रिय सहभागी साह अपना तरपसे कार्यक्रममे आर्थिक सहयोग करते आएल छथिन् । बज्जिका भाषा आ साहित्यके चिन्हाबेके हुनकर चाहना बहुत पहिलेसे ही रहलासे हुनका मनमे अपना तरपसे कुछ करेके लालसा रहे । अपना घरमे सरसलाह कएलाके बाद लोकसाहित्यके संरक्षणके लेल हुन पुरस्कारके स्थापना कएलन् । बज्जिकार्पण साहित्यिक त्रैमासिकमे प्रकाशित लोकसाहित्यके विधामेसे एकजने संकलकके सम्मानित करेके लेल सम्मानपत्रसहित एक हजार एक सय नगद देबेके हुनकर घोषणा हए । पुरस्कारके ही विषयमे केन्द्रित होके रौतहटके रघुनाथपुर ८ निवासी साहसे कएलगेल बाचचितके मुख्य अंश ः
अपनेके मनमे लोकसाहित्यके लेल पुरस्कारके स्थापना करेके चाहना केना आएल ?
साहित्यकारलोगके हौसला आउरो बढाबेके लेल हमनीके भाषामे पुरस्कारके स्थापना करनाइ जरुरी हए । साहित्यकारलोगके नाम इतिहासमे अमर होअलई, ऊलोगके मेहनतके कदर करेके लेल पुरस्कारके स्थापना करनाइ बहुत महत्त्वपूर्ण हए । हमपने साहित्यकार नहोएलासे बज्जिका भाषाके साहित्यके इतिहासमे कुछो करेके लालसासे पुरस्कारके स्थापना कइली । होसकले, पुरस्कारके स्थापनासे बज्जिका भाषाके इतिहासमे हमर नाओ भी आबे ।
पुरस्कार स्थापनाके उद्देश्य कथि हई ?
सबसे पहिले भाषाके विकास होनाइ ही हमर उद्देश्य हए । भाषाके प्रचारप्रसार करेके लेल पुरस्कारके स्थापना कइली । हर आदमीके मनमे रहलेकि हम कुछो करी, हमरो मनमे ई बात रहे । ओहीसे हम अपना मातृभाषाके साहित्यसेवा करेबालालोगके थप प्रोत्साहनके लेल कौनो पुरस्कार स्थापना करेके लेल कुछलोग सुझाव देलन् । कविलोगके लेल एगो पुरस्कारके स्थापना पहिलेही होगेल हए । अपना मातृभाषामे लोकसाहित्यके भन्डार हई । लोकसाहित्यके संरक्षण आ विकास तथा भाषाके प्रचारप्रसार करेके उद्देश्यसे हम पुरस्कारके स्थापना कएले छी ।
लोकसाहित्यके क्षेत्रके लेल ही काहे पुरस्कारके स्थापना कइली ?
हमनीके भाषाके लोकजीवनमे साहित्यके बहुत क्षेत्र हई । लोकसाहित्यके क्षेत्रमे काम करेबाला साहित्यकार लोगके हौसला मिली । लोकसाहित्य भी भाषाके विकासके एगो माध्यम हई । भाषाके विकासमे सहयोग करेके लेल आ आउरो लेखकसबके ध्यान जाएके लेल पुरस्कारके स्थापना भेल हए । हमर चाहना हए कि जेतना जल्दी होखो भाषाके विकास आ प्रचारप्रसार होएके चाहिँ ।
मगर लोकसाहित्यमे ही काहे ?
लोकसाहित्य हमनीके पूर्वजसे ही चलते आरहल हई । हमनीके समाजमे पूर्वजसे चलते आरहल चिजसब बहुत हई । भाषाके क्षेत्रमे छ� पबनीके गीत, कहाबत, कथा, गीतसब चलनमे रहल हई । अइसन सम्पत्तिके संरक्षण होखो । अइसन चिजके संरक्षण नहोएसकलासे बहुत त हेराभुला गेलई, जेहु बाँचल हई ओकरो संरक्षण करनाइ जरुरी हई । भाषाके सुरक्षाके लेल लोकसाहित्यमे छुपल भाषिक सम्पत्तिके अगाडु बढाबेके लेल लोकसाहित्यके क्षेत्रमे पुरस्कारके स्थापना करनाइ जरुरी बुझएलासे लोकसाहित्यमे ही पुरस्कारके स्थापना कएलगेल ।
पुरस्कारके नाओ एसएस लोकसाहित्य पुरस्कार काहे रखली ?
एसएसमे हमरा बाबुजी आ माईके नाओ छुपल हए । घरमे सलाह भेलकि बाबुजी आ माईके नाओसे ही पुरस्कारके स्थापना कएलजाए । बाबुजीके नाओ सुखल साह आ माईके नाओ सुनैना देवी साह होएलासे दुनुजनेके नाओके अंग्रजीमे लिखलापर पहिल अक्षरके एसएस पकडके पुरस्कारे नाओ एसएस लोकसाहित्य पुरस्कार नाओ राखली । बहुत सोंचबिचारके ही एसएस लोकसाहित्य पुरस्कार नाओ रखाएल हए । पुरस्कारके नाओ त रखहीके परतिअई, अपना बाबुमाईके सम्मानके खातिर ही दुनुजनेके नाओपर पुरस्कारके नाओ रखाएल हए ।
ई पुरस्कार केकरा देल जतई ?
बज्जिकाभाषी जहाँ होखो । बज्जिका त नेपालके मूलरुपसे तीनगो जिला आ भारतके बिहारके भी तीनगो जिलामे बोलल जालई । बज्जिका भाषाके लोकसाहित्यके सेवा करेबालाके ई पुरस्कार देलजतई । बज्जिकार्पण साहित्यिक पत्रिकामे एक बरिसमे प्रकाशित लोकसाहित्यके अनेक विधामेसे एकजने संकलकके एसएस लोकसाहित्य पुरस्कार आ सम्मानपत्रसे सम्मानित कएलजाई । नेपाल आ भारत दुगो देश हई, देशके सिमा बाँटल हई मगर भाषा नबाँटल हई । कौनो भेदभाव नकऽके हर साल ई पुरस्कार देलजाई ।
दोसर मातृभाषी भी त बज्जिकाके लिखलई ?
कहेके मतलब बज्जिका भाषाके लोकसाहित्यके संरक्षण करेबाला कौनो भी मातृभाषीके देलजाई । बज्जिका भाषाके लोकसाहित्यके संरक्षणमे जे योगदान दी ओकरा मिली । एइमे दोसरा मातृभाषी होगेल कहके भेदभाव नहोई, योगदानके मूल्यांकन कऽके पुरस्कार देहलजाई । नेपाली मातृभाषी, मैथिली मातृभाषी, भोजपुरी मातृभाषी भी बज्जिकामे लिखरहल हई । नेपाली आ मैथिली मातृभाषी त बज्जिकाके पुरस्कारसे सम्मानित भी होगेल छथिन् । बज्जिका लोकसाहित्यके संरक्षण आ विकासमे भी नेपाली मातृभाषीके सहयोग देखलगेल हए । ऊ सभी लोग पुरस्कारके भागी होइहन जे अपना मातृभाषाके लोकसाहित्यके लेल कुछ कऽके देखबइछत, चाहे कौनो मातृभाषी रहस् ।
पुरस्कारके रकम कम नहई ?
पहिलबेर स्थापना भेल हई । जदि कौनोके एगो संकलनके एक हजार रुपैया मिलइत हए त ओकरा कम नमानेके चाहिँ । वास्तवमे ई कौनो पारिश्रमिक नहोके पुरस्कार हई । पुरस्कारके मतलब सम्मान होखलई । सम्मान एक रोपैयाके होखो चाहे लाख रोपैयाके । लेकिन तइओ तत्काल बैंकमे खाता खोलके पाँच सात हजार रोपैया राखदेबई । आ पुरस्कारके अक्षयकोषमे रकम निरन्तर बढएते जाएम, हर साल दश हजार रखते जाएम । हम जौले जिन्दा रहबई तौले हर साल दश हजार रोपैया कोषमे जमा करते जबई । जब अक्षयकोषमे रकम बढइत जतई तब ओहीमोताबिक पुरस्कारके रकममे भी धीरेधीरे वृद्धि होइत जतई ।
पुरस्कार स्थापनाके घोषणा कएलाके बाद मनमे केना बुझाइता ?
भाषाला कुछ करेके चाहना त पहिलहिएसे रहे । दिलसे लगानी करेके इच्छा रहे । बज्जिका भाषाके साहित्यकार लोगके हौसला आउरो बढाबेके लेल पुरस्कारके स्थापना कइली । हमरा विश्वास हए कि एसे लोगके हौसला बढतई । जेलेखा सबके अपना बेटाबेटीपर माया रहलई ओहिना माया हमरा एहुपर हए । वास्तवमे पुरस्कारके स्थापना कएलाबाद हमरा मनमे एगो अलगे किसिमके शान्ति आ सन्तोष मिलल हए । दिलमे खुसी बुझाइअ । घरपरिवारमे भी सभीलोग खुसी हए ।
अन्तमे, आउरो कुछो कहे चाहम ?
हमरा इहे कहेके बा कि अपना मातृभाषाके विकासके लेल सभी आदमीके कुछोनकुछो करहीके चाहिँ । जे साहित्य लिखसकइअ हुनका साहित्य लिखेके आ जे नलिखसकइअ हुनका लिखेबालालोगके हौसला बढाबेके चाहिँ । बज्जिका एगो लोकभाषा होएलासे एक्कर संरक्षण आ विकास दुनु करेमे हर बुद्धिजीवी आदमीके योगदान देबेके चाहिँ । लोकसाहित्यके संकलनमे हर आदमी योगदान देके मातृभाषापर गर्व करु । हरेक आदमी अपना मातृभाषाके लेल कुछ जरुर करु ।
बज्जिका पत्रकारितामे अवसरके जरुरत हए :- प्रेमचन्द्र झा
प्रेमचन्द्र झा रौतहटेली पत्रकारितामे डेढ दशकसे सक्रिय प्रेमचन्द्र झाके जन्म रौतहटके हथियाही गाविस वार्ड नम्बर एकमे विक्रम सम्वत २०२८ सालके फगुआके दिन भेल हए । रौतहटेली पत्रकारितामे डेढ दशकसे सक्रिय प्रेमचन्द्र झाके जन्म रौतहटके हथियाही गाविस वार्ड नम्बर एकमे विक्रम सम्वत २०२८ सालके फगुआके दिन भेल हए । हुनकर पिताजीके नाम जुगलकिशोर झा आ माताजीके नाम महेश्वरी देवी हए । एगो नितान्त बज्जिका ग्रामसे पत्रकारितामे जिलास्तरके सबसे लमहर पद नेपाल पत्रकार महासंघ रौतहट शाखाके अध्यक्षतक बनल झा अनेक संचारमाध्यममे काम कएलेछत । लेकिन रौतहटके सदरमुकाम गौरमे संचालनमे आएल रौतहट एफएमके मार्फत बज्जिका भाषामे समाचार प्रसारण करेबाला जिम्मेवारी लेके काम करेबाला हुन पहिल पत्रकार छथिन् । अइसे भी कहल जासकइअ� रेडियोसे बज्जिका भाषामे समाचारके पहिल सम्पादक छथिन् हुन । हुनकासे पत्रकारिता आ साहित्यके सन्दर्भमे रहके ही बातचित कएले छी । प्रस्तुत हए ओही बातचितके मुख्य अंश ः
बज्जिकाके पहिल समाचार सम्पादनके अनुभूति केहन हए ?
बज्जिका जे हमर मातृभाषा है ओकर सम्पादन करेके जे हमरा अवसर मिलल ई काम शुरुमे बहुत कठिन आ चुनौती पूर्ण रहल ।
कठिनाई एइे बातके भेल जे समाचार लिखेकेके हमरा अनुभव रहे माकिर रौतहट एफएमसे पहिले कोनो संचार माध्यममे बेसी दिन रहेके सम्पादन करेके अनुभव नभेलासे भेल रहे । जब समाचार सम्पादन करते हप्ता १५ दिन नविते एक वडका लडाइ जितलीसे अनुभव भेल रहे । चुनौतीके जहाँतक बात कहदू हमरा साथे काम करेबाला सहयोगी जे लोग रहे से समाचार वाचनके अलावा दोसर काम ऊ लोगसे नहोय ।
समाचारके प्रस्तुतिसे लेकरके प्रवाह कएल जाएबाला सन्देश आ ओकर परेबाला असरके सिधा प्रहार हमरा समाचार कक्षतक आवे ।
जब हमर सहयोगी लोग समाचार पढे लागे त ओही रेडियोके (रौतहट एफएम) मनोरंजन प्राविधिक आ प्रशासन सेक्टरमे काम करेबाला लोग �अब शुरु भयो रमाइलो समाचार� कहके लोग टिरकारी मारे माकिर महिना दिन नबितते रेडियो भितर आ बाहरसे प्रशंसा भेल, से बात हम गवेसे कलेला चाहरहल छी । सबसे बडका खुशीके बात हमरा ई बातपर लागले ।
अपने जब रेडियोमे बज्जिकाके प्रवेश करइली त अपनेके आगे कइसन समस्या सऽ आएल रहे ?
रेडियोमे बज्जिका संचालक समितिके अध्यक्ष रेवन्त झा आ उपाध्यक्ष उत्पल मिश्र प्रवेश कराबेके तय करलेले रहथ ।
हमर भूमिका समाचार लिखेके सम्पादन करेके आ संयोजन करेके रुपमे रहे ।
समस्या बहुतो आएल लेकिन सबसे बडका समस्या देखी जे २�३ आदमी समाचार प्रस्तोता लोग रहे ओकरा अलावा दोसर व्यक्ति चाहकरके अपन मातृभाषामे भी समाचार वाचन करे नसके । कुछ आउर व्यवहारिक समस्या समयसमयपर आबइत रहे जेकरा हम स्वाभाविक रुपसे ली ।
समस्याके समाधान करेके लेल अपने कइसन उपाय अपनएले रही ?
कहल जालई जहाँ चाह उहाँ राह । उपाय सब हो अपनाएल गेल जेही कमे लोग रहे ओहीमे पलहा लगाके वाचन कराएल गेल । अब त बहुतो लोग बज्जिकामे समाचार वाचन करेबाला होगेल अवस्थामे यी बात पतिआनाइ भी भिराह हय ।
बज्जिका भाषा रेडियो एफएमजइसन अखबारमे काहे ओतना स्थान जमाबे नसकरहल हए ?
यी अपनेके प्रश्न बहुत महत्त्वपूर्ण हय । बज्जिका भाषामे रेडियोमे समाचार देल जारहल हय माकिर पत्रपत्रिका काहे न निकल रहल हय । एकर सबसे बडका कारण हय अशिक्षा ।
जेनाकि रेडियो पढल�नपढल सब सुनी आ पत्रिका त पढलके पढी । एलेल बज्जिका भाषामे पत्रिका भेलापर पाठक कम हय ।
अपनेके मालुल हय रौतहट जिला साक्षरतामे देशमे सबसे निचा पचहतरवाँ स्थानपर हय । अउरी किसिमके समस्या सब भी हय । नेपाली भाषामे जौन पत्रिका निकल रहल हय । बहुतो लेखक स्तम्भकार, समाचारदाता लोग हय । जौनोसे समाचार लेकरके लोग पत्रिकाके पेज भरसकइत हय, माकिर बज्जिकामे लिखेबाला बहुत कम लोग हए । एइसन अवस्था रहलापर भी अगर समन्वय सहकार्य होए त बाजिका भाषामे पत्रिका निकालल भी कौनो लमहर बात नहए ।
गैरबज्जिकाभाषी बज्जिका भाषापर बहुत आकर्षित होररहल हए मगर बज्जिकाभाषी ही कुछ हदतक उदासीन होएके कारण की हए ?
एकर बहुतो कारण हय । लगके मेला जे लेखा हल्ला बुझाले ठिक ओइसही हमरा यी बात लागरहल हय । अपन भाषा, अपन भेष, लोग भुलारहल हय । दोसर सब उठारहल हए । बज्जिका हमर मातृभाषा हए । ई भी कहेमे लोग हिचकिचाएके अवस्था हम देखले छी । उदासिन होएके आउर कारण सब हए, अवसर न भेलाके चलते भी बज्जिका भाषी बज्जिकाप्रति उदासिन हए ।
अभी करिब आधा दर्जन एफएमसे बज्जिकामे स्थानीय समाचार देबले, पहिल सम्पादकके हैसियतसे अपनेके अभी केना महसुस होइअ ?
बहुत खुशीके बात हय । जौन, समाचारके सन्चा हमनीके बनइली ओसे भी अभी कौनो अलग नहए । अपन मातृभाषामे समाचार प्रसारण होरहल ई बातसे जेतना खुशी छी कि बज्जिका भाषामे समाचारके आलावा अउरी चेतनामूलक कार्यक्रम सब प्रसारण होइत त बहुत खुशी होइती ।
स्थानीय एफएम सबमे बज्जिकामे ही बहुत कार्यक्रम उत्पादन आ प्रसारण होरहल हए, कुछो सुझाव देबे चाहम ?
बज्जिका भाषामे चेतनामूलक कार्यक्रम प्रशारण होए, से हमर सुझाव हए ।
बज्जिका भाषामे तुलनात्मक रुपमे लेखक�कविके कमी हई, स्थानीय पत्रिका आ एफएमसे कइसन सहयोग होसकले लेखक�कविके उत्पादनमे ?
बज्जिका भाषाके लेखक आ कवि लोगके भी बहुत सहुलियत होरहल हय रेडियो आ पत्रिकासे । अभीके हमनीके अवस्था की हएकि जे लोग जौना भाषामे लिखके देबले चाहे रेडियोमे प्रसारण करले हमनी ओही भाषामे देइले । लेखिन हमनीके चाहना रहले कि अपना भाषामे देइत त ठिक रलख । अपना भाषाके प्रोत्साहन भी नियमित रुपसे करते आरहल छी ।
अपने अपना मिडियामे बज्जिकाके केतना स्थान देइछी ?
हमनीके संचार माध्यममे बज्जिकाके स्थान शेरेमोनियल हए । जिल्ला प्रशासन कार्यालयमे पत्रिका दर्ता करवइत बेर बहुभाषा कहके दर्ता कराएल गेल हए । क्रान्तिद्वार दैनिक पत्रिका नियमित रुपसे प्रकाशन होएके एक वर्ष पूरा होए लागल हए । भाषिक हिसाबसे बहुभाषा कहके दर्ता भेलापर भी नेपाली भाषामे ही प्रकाशन होरहल हय । बज्जिका वा अन्य भाषामे पवनिए तिहारके कौनो समाचार रखा गेल होई । एकर बहुत कारण सब हय । जौनामे सबसे बडका कारण लिखाइ हए ।
रेडियोके समाचार सम्पादन आ पत्रिकाके समाचार सम्पादनमे केतना फरक हए ?
सम्पादन करेके काम रेडियो आ पत्रिकामे एतने फरक हय कि कौनो बात मौखिक आ लिखित हए ।
एकर अन्यथा अर्थ नलागेकि रेडियोके सम्पादकके सब बात हावामे चल जाले । अब प्राविधिक रुपसे एतना विकास भेल हए कि पलपलके प्रशारण रेकर्ड होइत रहले ।
पत्रिका जेतना दोहरा�तेहराके लोग लाइन, हरफ, अनुच्छेद देखले ओतना रेडियोके रेकर्डिगं सुनल सबके पहुँचके बात नहए ।
बज्जिका पत्रकारिता सम्भव होसकले कि न ?
बज्जिका पत्रकारिता सम्भव भेलाके नातासे अपने आई हमरा ई बात रखेके अवसर देली ह । एइसही अवसर देवेबाला संचार संस्थाके अउरी खोजी कएल जरुरी हय । हमरा विचारमे त रौतहटमे बज्जिका पत्रकारिता स्थापित होेएलागल हय । सब रेडियो बज्जिकामे समाचार प्रसारण कररहल हए ।
समाचार लिखेबालाके पारिश्रमिक मिलरहल हए कि नमिल रहल हय, ई सबसे बडका प्रश्न हए । जौना दिन श्रमजीवी पत्रकार अपन श्रमके पारिश्रमिक पावेके अवस्थामे पहुँच जाई बुझल जाओ, ओ दिन बज्जिका पत्रकारिता स्थापित हो गेल ।
बज्जिकाके साहित्य, पत्रकारिता आ चेतनासे अपने सन्तुष्ट छी ?
बज्जिका भाषाके राज्य अन्य भाषा सरह स्थान जे देले बुहत प्रशंसनीय बात हए । एकर विकास आ अउरी प्रचारप्रसार करेके लेल राज्य अपन भाषाके बजेट देइतसे हमर माग हए ।
अपन देशमे शिक्षा क्षेत्रमे जओन तरहसे विकास होरहल हए । बज्जिका भाषामे पुस्तक प्रकाशन करेबाला, लेखक, साहित्यकार, समाचार सम्प्रेशन करेबाला संचार माध्यम आ पत्रकार सबके पुरस्कारके व्यवस्था होइत त भाषाके प्रति ई क्षेत्रके लगाव बढइत ।
अपनेके ई संचार माधयमसे हम आग्रह करम बज्जिका क्षेत्रके तमाम आदरणीय जनसमुदायसे कि अपन भाषाके विकास कैसे हो एप्रति सब लोग आवाज उठाएल जाओ ।
अन्तमे आउरो कुछो कहे चाहम ?
अन्तमे ई अवसर देली ओकरा लेल बहुत बहुत धन्यवाद आ आभारी छी ।
मधेशके अधिकारी हि हमनीके अभियान :- मल्लिक
ललित मल्लिक सानु मधेशी सपुत्र जे मधेशीके हरेक आन्दोलन, मधेशी जनताके हर मुद्दा पर डटके लडेवाला राजनितिकके पोखता मधेशके हरेक तरहके सोचवाला, युवा नेतृके सक्षम युवा जोसीला युवा विधार्थी जिवनसे ही राजनितिक करइत आएल एगो नाम हए, जे रौतहट जिल्लाके गाविस राजपुर तुलीसमे जनमले मधेश और मधेशीके लालके रुपमे रहल तराई मधेश राष्ट्रिय अभियान युवाके केन्द्र अध्यक्ष ललित मल्लिक सानु साथे बज्जिका वाणी साप्ताहीक साथे भेल समसमायी बातचीतके कुछ हिस्सा:
ललीत जि अभि कि साव हो रहल हए ?
राजनितिक रुपसे दोसरका संविधान सभा प्रतिगमनकारी होई ई हमसव निर्वाचनसे पहिलेही आंकलन कएले रही जेकरा कारण हमरा सवके संग न तराई मधेशी राष्ट्रिय अभियान निर्वाचनमे सहभागी नभेल और हमसव ोस निर्णय कएले रही की मधेशी जनताके जायज मागँ संघियता, सुसासन, समान्ता, सम्मान औ न्यायके लेल संघर्ष एगो मात्र विकल्प रहल गेल हए । उ संघर्ष केलेल हमसव पुरा मधेश भर प्रशिक्षण और संग न निमार्ण पर जोड देके एगो शसक्त और निर्णायक अधिकार मुखी संघर्षके तयारी कररहल छी । मधेशके अधिकारी हि हमनीके अभियान रहल ।
लोक्तान्त्रीक या प्रजातान्त्रीक पद्तिहए कि राजनितिक दल सवके निर्वाचनके द्वारा ही सम्पन्नता होईअ ?
देखु मधेशीके राजनितिके अवस्था बुहत भद्रगोल रहलासे निर्वाचन या अधिकार मागेसे पहिले अपने सहि निर्णय उ निर्णयमे सवके समान्न धारर्ण आवश्यक्ता रहल हए । आज सम्मान धारण नभेलासे मधेशीके राजनिति पिछा रहल हए ।
उहे उदेश्यसे कोनो भी हालतमे मधेशीके हितमे दोसरका संविधान सभा नहोसकेके आकलनसे मात्र संग नके विस्तार करके एगो सक्षम कार्यकर्ता निमार्ण हेतु हमसव निर्वाचनमे नगेली आज पता चल गेल ही हए कि केतना कारगर हए मधेश और मधेशीके लेल ।
अपनेके अध्यक्ष जय प्रकास प्रसाद गुप्ता एगो भ्रष्टाचारी नेता भेलासे अपने छवि या अपन स्तीत्व बचावेला ई अभियान संचालन कएल आरोप रहल ?
दिनेश जी राज्य सदैव अपन विरोधी कहु या हितविपरित कार्य करेवाला हरेक व्यक्ति या संग नके लान्छीत करके नेपालके इतिहास बहुती पुराना हए । जल्वन्त उदाहारण नेपालके प्रजातान्त्रीक नायक वि.पि कोइराला पर भी ओहन कओगो लान्छना लगावल गेल ।
भिमसेन थापासे लेके बाबुराम भट्टराई होइत जयप्रकास प्रसाद गुप्ता तक राज्यद्वारा कओनो न कओनो लान्छनासे कलंकित करइत आएल हए । लेकिन एकर ई मतलव नहए कि उ व्यक्ति संघर्ष ही छोडके चल जाई । और जेपि गुप्ता भी उ लान्छनाके अपन एगो संघर्षके चरन मानइत मधेशी जनताके विचमे छत और अपन संघर्षके अगाडी बढारहल छत । हुन्कर लान्छनाके सत्यता मधेशी जनता भली भाती बुझ रहल हए । तमरा अभियानके ११ महिने अवधिमे मधेशी जनताके अपार सहयोग मिल्ल जेसे ई संग न मधेशीके शसक्त क्रान्तीकारी संग नके रुपमे आएल हए ।
मधेशके मुद्दा एक भेलापर भी मधेशी राजनितिकदलसव फुटेके कारण कि होसकइत हए ?
देखु सांग नीक संरचना त हए हि हए लेकिन संघर्षके क्रममे विश्वके इतिहास रहल हए कि संघर्षील संग नमे अनवरत रुपमे फुटेके प्रक्रिया चलते आएल हए, आ भविषयमे भि एकरा रोकेके कओनो सयन्त्र न बनल हए । रहल मधेशके सन्दर्भमे एकर छोट राजनितिक ईतिहास भेलासे मधेशीके संग नीक अभ्यामके अभाव देखल गेल जेसे फुटेके प्रक्रिया अभितक जारी हए लेकिन जइसे जइसे संग नीक अभ्यास और नेतृत्वके विकास होइत जाई ओइसही अपने आप निर्मूल होजाएवाला समस्या रहल हए ।
अपनेके पार्टीके मधेशके कएगो जिल्लामे संग न विस्तार होचकल हए ?
अभि त हमनीके पार्टी तराई मधेशी राष्ट्रिय अभियान मधेशके १८ जिल्लामे जिल्ला कमिटि विस्तार होचुकल हए । बार्की और भी जिल्लामे विस्तार होएके क्रम जारी रहल हए ।
दोसरका संविधान सभाके मान्डेड रहल हए कि माघ ८ गेतके नेपाल नयाँ संविधान पावेवाला हए । अपनेके कईसन लागल हए, जारी हो सकइत हए की ?
भगवान करे कि नेपाल नयाँ संविधान पाए, लेकिन हमरा न लागरहल हए कि माघ ८ गते जारी हो सकी, अगर जारी भी होइत मधेश और मधेशी जनताके हितके कदापी नहोसकी । और हमनी मधेश और मेधशीके अधिकार विनाके संविधान कदापी मानेके लेल तयार नछी । .
अभि तक अपनेके संग न मधेशके या मधेशीके अधिकारके लेल कि की कर रहल हए ?
देखु हमसे मधेश और मधेशी के हरेक अधिकारके लेल डल रहल छी । वितल चइतमे एस एल सी परिक्षामे जनपुरके धवैली परिक्षा केन्द्रमे राज्यद्वारा गोली चलाके ओदिनके समाजीक विषयके परिक्षा स्थगित करावल गेल रहे । जेकर पुनः परिक्षा करावेला हम खुद उहाँ १३ दिन तक अनसनमे बइ के पुनः परिक्षा करएले रहली । एडिवि प्रोजेक्ट जनकपुरमे राखेके लेल धारण पर समेत बइ ल रहली ओइसही रौतहटके किसानके आन्दोलन प्रति पूर्ण सहयोग करइत आएल छी । अइसही मधेश और मधेशीके मुद्दाप्रति साथ देइत अपन संग नके विस्तार कररहल छी ।
रौतहटके किसान सवेके आन्दोलनमे ईहाँके राजनितिक दलसव लम्हर पइसाके खेलमे लागल सुनेमे आएल हए ?
देखु रौतहटके ई किसानके आन्दोलन रौतहटके दु किसीमके वर्गके विचके द्वन्द्वके रुपमे चित्रीत होएलके समाजीक अवस्था हए । एगो रौतहटके करपोरेट समाज और दोसर रौतहटके आम समाज ओमे आम समाजके नेता आम समाजके ओर हए और करपोरेट समाजके नेता करपोरेट समाजके ओर हए । करपोरेट समाजके नेता पइसाके खेलमे लागल हए । अव जनताके मुल्यांकल करके समय हए हुनकर नेता कओन हए ।
अन्तमे मधेशी जनतो कि कहेके चाहवई ?
हम बज्जिाका वाणी साप्ताहीके माध्यमसे मधेशी आम समुदायके लोगके ईहे कहव की मधेशी गुलामीसे निलकेके झोकमे रहल हए । एकवार झोक अपने भी लगाउ ।
ई पत्रिकाके कओनो सल्लाह सुझाव हए की ?
बास्तवमे हमनी रौतहट जिल्लावासीके गर्वके विषय रहल ई बज्जिका वाणी पत्रिकार जेसे हमनीके अपन मातृ भाषा पहिचना दिलारहल हए । ई पत्रिकाके निरंतरत दईत रहु, सदैव चलइत रहे इहे कामना करइ छी । धन्यावाद !
‘छोटा मानव’ समाजीक संजाल पर भायरल
रौतहट । आजकल व्हाट्सअप्पसे लेके फेसबुक और ट्विटर पर एगो अजीब जीवके फोटो भायरल होरहल हए जेकरा ‘छोटा मानव’ कहला जारहल हए । सोशल मीडियाके मुताबिक जोधपुरके बावड़ी गावमें ट्यूबवेल (कल)काडेकेले खोदाईके दौरान निकल्ल हए छोटा मानव । देखेमें हुबहू इंसानके जईसन देखेवाला जिवमे हाथ पैरक ेअंगुरिसब भी देखल जारहल हए । हालाँकि माथा देखेम वेंगके जइसन लागइत महसुस कहएल जारहल हए । समाजीक संजाल पर देखेवाला अइवसन एलियन, हनुमानके अवतार, इंसानी बेंग आदि नामसे बतावल जारहल हए । अभी तक ई खबर सिर्फ कोहराम पर प्रकाशित कएल गेल हए अभीतक यहाँके सरकारके ओरसे अइसन कोनो सुचना नआएल हए फोटो और जानकारी ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सएप्प से भारतके कोहराम डट कम जनएले हए ।
रौतहटमे पहिलवार लावा मोवाईल आ स्थानिय रिटेलसव साथके अन्तरक्रिया
रौतहट जिल्लामे पहिलवेल मोवाईल कम्पनी आ स्थानिय विक्रेता साथे अन्तरक्रिया कार्यक्रम सम्पन्न भेल हए । भारतीय कम्पनी लावा मोवाईलके नेपालमे सप्लाई करेवाल अम्वे ग्रुप रौतहट जिल्लाके स्थानिय मोवाईल विक्रेता सव साथे लावा मोवाईलके वारेमे अन्तरक्रियात्क कार्यक्रम कएल गेल हए ।
सदरमुकाम गौर स्थित सिया पैलेस होटलमे शुक्रवारके उक्त अन्तरक्रिया कार्यक्रम सम्पन्न भेल हए । नेपालमे मोवाईलके दुनियामे दोसरका स्थानमे रहल लावा मोवाईलके प्रयोग रौतहटमे पहिल स्थानमे रहल लावा मोवाईलके पुषकर घिमीरे जानकारी देलन । रौतहट डिष्टरीव्युटर साहेव साहके विशेष पहलमे कार्यक्रम भेल प्रदिप धार्मी बतएलन । अन्तरक्रिया कार्यक्रममे लावा मोवाईलके सर्वीस सेन्टर गरुडा बजारमे खोलेके समेत पुसकर घिमिरे प्रतिवद्धता जनएले रहलन । उक्त अन्तरक्रिया कार्यक्रममे जिल्लाके चन्द्रपुर, कटहरीया, विजयपुर, गरुडा, पिपरा बजार आ गौरके स्थानिय रिटेलसवके उपस्थित रहल रहे ।
वृहस्पतीके नयाँ तस्वीर सार्वजनीक कएले हए नासा
राैतहट । अमेरिकी अन्तरीक्ष संस्था नासा सौर्यमण्डलके सबसे लम्हर ग्रह बृहस्पतीके नयाँ तस्वीर सार्वजनिक कएले रहे । जूनो नामक भूउपग्रहसे खिचल गेल नयाँ तस्वीरसव नासा सार्वजनिक कएले हए । ई तस्वीरसवमे वृहस्पतीके दुनु ध्रुवमे ग्यासके लम्हर लम्हर बादलसव घुमईत रहेके नासा जनएले हए । ऐसे पहिले वृहस्पती ग्रहके कओनो भी तस्वीरमे अईसन बादल नदेखल गेल हए ।
वितल जुलाई ५ मे वृहस्पतीके कक्षमे स्थापित भेलसाथे जूनो नाम स्याटेलाइट पहिलवेर बृहस्पतीके नजदिक नजदिक पुगके उक्त ग्रहके विभिन्न तरहके तस्वीर तथा और भी जानकारीसव बटोर गेल हए ।
बृहस्पतीके उत्पत्ति तथा विकाशके साथे सौर्यमण्डलके रहस्य पत्ता लगावेला नासा जूनो नामक भुउपग्रह प्रक्षेपण कएले रहे । बृहस्पतीके कक्षमे रहलापर ई स्याटेलाइट ग्रहके बनावट, तापक्रम, गति लगायतके तथ्यसव पत्ता लगाई ।
ऐसे वृहस्पतीमे रहल लम्हर दाग तथा उहाँ उठेवाला तुफानसवके वारेमे भी जानकारी वटोरी । जूनो अभि एक अण्डाकार मार्गमे घुमईत बृहस्पतीके नजदिकसे गुजररहल हए । ऐकरा वृहस्पतीके एकवेर परिक्रमा करेला ५३ दिन लागईत हए । सन् २०१८ के फेब्रुअरीमे जूनो बृहस्पतीमे ही नष्ट होई । ओसे पहिले तक उ ई ग्रहके बारेमे विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारी जुटावेके विश्वास वैज्ञानिकसवके रहल हए ।
बज्जिका भाषाको पहिलो भक्ति एलबम सार्वजिनक
राैतहट, साअाेन २७। बज्जिका भाषाको पहिलो भक्ति एलबम सार्वजनिक भएको छ । मध्यरौतहटमा रहेको रेडियो मधेस मसला एफएममा बजाएर बज्जिका भाषाको पहिलो आधुनिक भक्ति एलबम बम बम भोले सार्वजनिक गरिएको हो । गायक तथा लेखक चन्दन पटेलको शब्द र स्वर रहेको एकल गीतको बज्जिका साहित्य संगमका मनोजकुमार चौधरीको निर्देशन तथा साहित्यकार सञ्जय मित्रको सम्पादनमा निर्माण भएको छ ।
एलबमको निर्माण पवन राठौरले गरेका छन् भने गरुडामै रहेको आतिश रेकर्डिङ स्टुडियोमा रेकर्ड तथा सम्पादन गरिएको छ । पटेलको गीत सार्वजनिक भएसँगै नेपालीय बज्जिकाको आधुनिक भक्ति गीतको नयाँ क्षेत्रको विकास भएको बज्जिका साहित्य संगमका अध्यक्ष श्याम सहनी चन्द्रांशुले प्रतिक्रिया दिएका छन् । यसअघि गायकद्वय सञ्जय राज र नथुनी बसेराद्वारा बज्जिका समाज नामक पहिलो आधुनिक बज्जिका गीति एलबम सार्वजनिक गरिएको थियो । बज्जिका समाज एलबममा समेटिएका आधुनिक गीतहरु रेडियोहरुमा अहिले पनि निकै चलेको देखिएको छ ।